लौँडा किसी को दिल ओ जान से चाहता है और लड़की भी उसे ही पसंद करती हे ।
च्युँकि उसे अपनी माँ पर यकिन था की उसकी माँ उस लड़की से
उसकी शादी करवा देगी ।
उसने अपनी दिल की बात माँ को बतादिया अब उसकी माँ थीँ बड़ी चालवाज !
उसने उस लड़की को ऐसा धमकाया की अब वो लड़के से दूरी बनाने लगी ।
लौडेँ का दिल चंचल था , उसका वो बदमाश दिल एक और कमलनयना पर आ गया ।
लड़की उसे टकटकी लगाकर देखा करती थीँ लड़का उसके मोहफास मेँ फँसगया ।
इसबीच उसकी माँ को इस काँड़ का भनक लगगया सो उसने वो दुसरीवाली लड़के के घरवालोँ को कहदिया की इसकी शादी करवा दो ।
इसतरह से एक माँ नेँ अपने बेटे के शादी मेँ दहेज पाने के चक्कर मेँ अपने बेटे के दिल से छल किया ।
कहानी लिखेजानेतक तिनोँ की शादी हो चुकी है और वो लौँडे का दुसरीवाली लड़की से शादी हुआ । लड़के ने लड़की को भगाकर शादी कर लीँ च्युँकि वो दोनोँ एक ही जाति के थे अतः इसमेँ किसी को ज्यादा आपत्ति भी न हुई ।
यह मेरे गाँव का एक किस्सा है ,,,,और इससे यही मोराल मिलता हे कि दिल की राज अपनी माँबाप से भी छुपाकर रखो अगर वो यकिन के लायक नहीँ हो ।
परंतु यहाँ एकबात समझमेँ नहीँ आया कि आखिरकार किसका प्यार सच्चा था पहलीवाली लड़की का या दुसरीवाली का ?
लेबल
- अनुवाद (3)
- कविता (47)
- काहानी (8)
- जीवन अनुभव (38)
- तर्क वितर्क (4)
- दिल से (16)
- पदचिन्ह (7)
- व्यंग्य (8)
- शब्द परिचय (7)
- हास्य कविता (1)
सोमवार, 20 अप्रैल 2015
माँ ने दिया अपने ही बेटे को धोखा
गुरुवार, 2 अप्रैल 2015
बग्गा मामा की करामात्
गाँव मेँ आज # बग्गा_मामाजीके कारनामोँ कि चर्चा है !!!!
मामीजी तो वैसे भी उनकी बहन कि शादी मेँ Busy है
इधर मामाजी भूवनेश्वर से आज सुबह सवेरे गाँव लौट आये
आते हि गाँव के देशी भट्टी से दो तीन वटल चढ़ा लिया
और स्नान के लिये नदी कि और चल दिये
अब नदी मेँ स्नान करते समय उनका सामना # गाँजा_गुरुओँसे हो गया !
युँ तो गाँजा पीनेवाले खुद को धार्मिक बताते है पर वो असल मेँ बड़े धृत होते है ।
मेरे बेचारे भोलाभाले मामाजी को बहकाने लगे चिढ़ाने लगे
मामाजी को गुस्सा आ गया और उन्होने एक को # ब्राह्मणी_नदीमेँ डुबा देने कि कोशिश कि पर उनके चेलोँ ने बचालिया !
अकल ठिकाने आ गया होगा
मामाजी इतने मेँ रुक जाते तो ठिक था पर उन्होने तो फ्री मेँ एक और पंगा ले लिया
अब उनका नशा उतरगया था वो स्नान के बाद फिर भट्टी कि और चलदिये
अब वहाँ किसी दलित वर्ग नेँ उसे चिढ़ाया
फिर क्या था उन्होने उनसब पर अपशब्द कि वारिस करदिया
अब देखिये कुत्तोँ के झुँड होता है ! आ गये हमरे मामा को काटनेऔर हमारे मामा 56 इंच के छाती के साथ आखरी दमतक लढ़ते रहे
आपको बता देँ कि बग्गा मामा वही है जिन्होने कुछदिन पहले हमारे पंचायत के सरपंच को चैलंच दिया था और गाँव के लिये उन्हे केजरीवाल कि तरह जैल जाना पड़ा था !
लोग अकसर उन्हे केजरीवालजी जैसा बदनाम करते पर गाँववालोँ को पता है वो कितने ईमानदार है
मामीजी तो वैसे भी उनकी बहन कि शादी मेँ Busy है
इधर मामाजी भूवनेश्वर से आज सुबह सवेरे गाँव लौट आये
आते हि गाँव के देशी भट्टी से दो तीन वटल चढ़ा लिया
और स्नान के लिये नदी कि और चल दिये
अब नदी मेँ स्नान करते समय उनका सामना # गाँजा_गुरुओँसे हो गया !
युँ तो गाँजा पीनेवाले खुद को धार्मिक बताते है पर वो असल मेँ बड़े धृत होते है ।
मेरे बेचारे भोलाभाले मामाजी को बहकाने लगे चिढ़ाने लगे
मामाजी को गुस्सा आ गया और उन्होने एक को # ब्राह्मणी_नदीमेँ डुबा देने कि कोशिश कि पर उनके चेलोँ ने बचालिया !
अकल ठिकाने आ गया होगा
मामाजी इतने मेँ रुक जाते तो ठिक था पर उन्होने तो फ्री मेँ एक और पंगा ले लिया
अब उनका नशा उतरगया था वो स्नान के बाद फिर भट्टी कि और चलदिये
अब वहाँ किसी दलित वर्ग नेँ उसे चिढ़ाया
फिर क्या था उन्होने उनसब पर अपशब्द कि वारिस करदिया
अब देखिये कुत्तोँ के झुँड होता है ! आ गये हमरे मामा को काटनेऔर हमारे मामा 56 इंच के छाती के साथ आखरी दमतक लढ़ते रहे
आपको बता देँ कि बग्गा मामा वही है जिन्होने कुछदिन पहले हमारे पंचायत के सरपंच को चैलंच दिया था और गाँव के लिये उन्हे केजरीवाल कि तरह जैल जाना पड़ा था !
लोग अकसर उन्हे केजरीवालजी जैसा बदनाम करते पर गाँववालोँ को पता है वो कितने ईमानदार है
शादीवाले दिन ही कन्यापक्ष के हातोँ पिटगये बाराती और दुल्हा
ये करिबन 7 साल पहले कि बात होगी । ब्राह्मनी नदी के उस पार पड़ोशी गाँव तेँतुलियापड़ा मेँ एक लड़की की शादी अचलकोट गाँव [कटक जिल्ला] के एक लौँडे से हो रही थी । अब हुआ ये की शादीवाले दी लौडेँ ने एक्साईमेँट मेँ थोड़ा ज्यादा चढ़ा लिया और गाड़ी ठोक दी । हालाकी इससे उसका खास नुकशान न हुआ ,मामुली खरोच पर पट्टी लगाकर लौड़ाँ शादी के लिये तैयार हो गया । रस्ते मेँ उसके एक दोस्त नेँ उसे कहा
"देखा शादी से पहले एक्सिडेँट हो गया बेटा शादी करने पर कहीँ तेरा राम नाम सत्य न हो जाय "
ये एक मजाक या जोक था
पर लौँडा तो सिरियस हो गया
कहाँ वो सौम्य सुकुमार रुप लेकर शादी करने चला था एकाएक उसमेँ विनाशकारी शिवजी प्रकट हो गये ।
शादी के मंडप मेँ फुल टल्ली होते हुए उसने और ज्यादा दहेज और गाड़ी माँगना शुरुकरदिया । लोग उसे चुप करने गये तो वो अपशब्द या गाली देने लगा ।
लड़कीवालोँ को झुकना था सो वो चुप रहे परंतु लड़की को ये सहन न हुआ और उसने लौडेँसे शादी करने से मना करदिया । अब घरवाले परेशान की क्या करेँ ? घर की बदनामी अलग लड़की से शादी कौन करेगा ?
ईतने मेँ हमारे स्मार्ट सोमुचाचा नेँ आगे आकर कहा मेँ उसका लवर हुँ मेँ उससे शादी करुगाँ !
गाँववाले हैरान और खुश थे
शादी हो गया !
इधर अचलकोट गाँव का दुल्ल्हा अपने बारातीओँ को साथ घर मेँ बँद था या युँ कहेँ कैद था ।
शादी खत्म होने के बाद तेँतुलियापड़ा गाँव के लोगोँ ने उनकी अछी खातिरदारी की और सोमुचाचा बतारहे थे की दुल्ल्हे को 2 दिन बाद खिला पिला कर पुलिसवाले मामाओँ के साथ उसके गाँव भेजा गया था !
"देखा शादी से पहले एक्सिडेँट हो गया बेटा शादी करने पर कहीँ तेरा राम नाम सत्य न हो जाय "
ये एक मजाक या जोक था
पर लौँडा तो सिरियस हो गया
कहाँ वो सौम्य सुकुमार रुप लेकर शादी करने चला था एकाएक उसमेँ विनाशकारी शिवजी प्रकट हो गये ।
शादी के मंडप मेँ फुल टल्ली होते हुए उसने और ज्यादा दहेज और गाड़ी माँगना शुरुकरदिया । लोग उसे चुप करने गये तो वो अपशब्द या गाली देने लगा ।
लड़कीवालोँ को झुकना था सो वो चुप रहे परंतु लड़की को ये सहन न हुआ और उसने लौडेँसे शादी करने से मना करदिया । अब घरवाले परेशान की क्या करेँ ? घर की बदनामी अलग लड़की से शादी कौन करेगा ?
ईतने मेँ हमारे स्मार्ट सोमुचाचा नेँ आगे आकर कहा मेँ उसका लवर हुँ मेँ उससे शादी करुगाँ !
गाँववाले हैरान और खुश थे
शादी हो गया !
इधर अचलकोट गाँव का दुल्ल्हा अपने बारातीओँ को साथ घर मेँ बँद था या युँ कहेँ कैद था ।
शादी खत्म होने के बाद तेँतुलियापड़ा गाँव के लोगोँ ने उनकी अछी खातिरदारी की और सोमुचाचा बतारहे थे की दुल्ल्हे को 2 दिन बाद खिला पिला कर पुलिसवाले मामाओँ के साथ उसके गाँव भेजा गया था !
सोमवार, 5 जनवरी 2015
शुन्य एक गजल
दुःख मेँ जीवन कि अंत होगा कौन समझेगा
धीरज रतन कि खान है कौन समझेगा
शैया मिलता है काटेँदार फुलोँ कि प्यार मेँ
सरल हृदय को ज्ञात था कौन समझेगा
लुटगया चार घडी के प्रवास मेँ
युगोँ युगोँ से पहचान थी कौन समझेगा
वैद गये और कुछ आराम मिलगया
दर्द ही मेरा मर्ज था कौन समझेगा !
दे गई जो धार जमाना कि जीभ ने
निज कर्मोँ कि प्रायश्चित थी कौन समझेगा !
जहाँ जहाँ मिले उडते सौन्दर्य कि ध्वजा ।
वहाँ वहाँ प्रेम कि पदचिह्न थी कौन समझेगा ।
पागल के मौन से जिस कयामत से परिचय हुआ था ।
मित्था अभिमान भरा अभिव्यक्ति थी कौन समझेगा ।
कारण न पुछ प्रेमी हृदय . जन्म मृत्यु कि निर्दोष खेचतान थी कौन समझेगा ।
वेहोश हो गया मौत जिसके लिये
जीवन सुरा कि मद थी कौन समझेगा
ईश्वर के रुप मेँ जिन्हे सारादुनिया जाने
वो शुन्य कि ही पहचान थी कौन समझेगा
(गुजराती शायरी "शुन्य"कि हिँदी अनुवाद]
धीरज रतन कि खान है कौन समझेगा
शैया मिलता है काटेँदार फुलोँ कि प्यार मेँ
सरल हृदय को ज्ञात था कौन समझेगा
लुटगया चार घडी के प्रवास मेँ
युगोँ युगोँ से पहचान थी कौन समझेगा
वैद गये और कुछ आराम मिलगया
दर्द ही मेरा मर्ज था कौन समझेगा !
दे गई जो धार जमाना कि जीभ ने
निज कर्मोँ कि प्रायश्चित थी कौन समझेगा !
जहाँ जहाँ मिले उडते सौन्दर्य कि ध्वजा ।
वहाँ वहाँ प्रेम कि पदचिह्न थी कौन समझेगा ।
पागल के मौन से जिस कयामत से परिचय हुआ था ।
मित्था अभिमान भरा अभिव्यक्ति थी कौन समझेगा ।
कारण न पुछ प्रेमी हृदय . जन्म मृत्यु कि निर्दोष खेचतान थी कौन समझेगा ।
वेहोश हो गया मौत जिसके लिये
जीवन सुरा कि मद थी कौन समझेगा
ईश्वर के रुप मेँ जिन्हे सारादुनिया जाने
वो शुन्य कि ही पहचान थी कौन समझेगा
(गुजराती शायरी "शुन्य"कि हिँदी अनुवाद]
मंगलवार, 17 जून 2014
यादेँ
मेँ तब 8 वीँ तकक्षा मेँ पढ़ता था । हमारे गाँव मेँ केनाल बनानेवाले कंट्राकटर हमारे घर मेँ भाड़े पर रहने लगे । वे रोज ढ़ेकाँनाल से 7 8 अखबार मंगवाते । ओड़िआ हिँदी और अंग्रेजी भाषा मेँ । मुझे पढ़ने का शौक लगा था उनदिनोँ और स्कुली किताबोँ के साथ अतिरिक्त ज्ञान प्राप्त करने हेतु मेँ दुसरे किताबेँ और पत्रपत्रिका भी पढ़ता था । मुझे जब ज्ञात हुआ की हमारे घर मेँ भाड़े पर रहनेवाले कन्ट्राक्टर अखबार मंगवाते हे मेँ उनसे निकटता बनाने की जुगत मे लग गया । एकदिन वे अखबार पढ़रहे थे मैनेँ The hindu न्युजपेपर को उठाकर पढ़ने लगा । उन्होने कुछ सोचा और प्रश्न किया "तुम्हे अंग्रेजी आता है ? " ! मैनेँ कुछ सोचकर उत्तर दिया "जी पर मेँ अंग्रेजी मेँ वाक्य गठन कर नहीँ पाता ।" ! वे कुछ साधारणज्ञान सम्बंधी प्रश्न पुछने लगे मैनेँ उत्तर दे दिया आखीर मेँ उन्होने पुछा की बताओ अंग्रेजी भाषा मेँ कितने Tense हे । मैनेँ कहा 2 ! उन्होने कहा 3 । वो अपने बात पर अड़े रहे मैनेँ भी स्कुल के अन्य छात्रोँ को बुलाकर अपना पक्ष रखा । आखिर मेँ हम सब K.P.High School के अंग्रेजी शिक्षक प्रमोद मिश्र जी से मिलने गये । उन्होने हम सबको सही ठहराया । प्रमोद सर नेँ कहा की अंग्रेजी मुख्यतः दो प्रकार के है अमेरिकन अंग्रेजी । ऑल्ड अंग्रेजी । ब्रिटेन मेँ आज भी लोग 3 Tense मानते हे परंतु अमेरिकन अंग्रेजी मेँ 2 Tense बताया गया हे । ब्रिटेन के लोग रक्षणशील हे वे आज भी पुराने अंग्रेजी का इस्तेमाल करते परंतु न्युवर्ल्ड मेँ लोग भविष्य को Tense न मानकर Time मानते । जब भविष्य आया ही नहीँ उसके बारे मेँ हम ठिक ठिक कैसे बता सकते हे ? हम केवल अंदाजा लगा सकते हे की कल ऐसा होगा वैसा होगा पर वे अंदाज गलत भी हो सकते हे । आखिरकार झगड़ा खत्म हुआ और सारे लोग अपने अपने रास्ते हो लिये ....लेकिन उस दिन से वे कन्ट्राकटर मुझसे अछा बर्ताप करने लगे और हम अछे दोस्त बनगये ।
यादेँ भाग 1
मेँ तब 8 वीँ तकक्षा मेँ पढ़ता था । हमारे गाँव मेँ केनाल बनानेवाले कंट्राकटर हमारे घर मेँ भाड़े पर रहने लगे । वे रोज ढ़ेकाँनाल से 7 8 अखबार मंगवाते । ओड़िआ हिँदी और अंग्रेजी भाषा मेँ । मुझे पढ़ने का शौक लगा था उनदिनोँ और स्कुली किताबोँ के साथ अतिरिक्त ज्ञान प्राप्त करने हेतु मेँ दुसरे किताबेँ और पत्रपत्रिका भी पढ़ता था । मुझे जब ज्ञात हुआ की हमारे घर मेँ भाड़े पर रहनेवाले कन्ट्राक्टर अखबार मंगवाते हे मेँ उनसे निकटता बनाने की जुगत मे लग गया । एकदिन वे अखबार पढ़रहे थे मैनेँ The hindu न्युजपेपर को उठाकर पढ़ने लगा । उन्होने कुछ सोचा और प्रश्न किया "तुम्हे अंग्रेजी आता है ? " ! मैनेँ कुछ सोचकर उत्तर दिया "जी पर मेँ अंग्रेजी मेँ वाक्य गठन कर नहीँ पाता ।" ! वे कुछ साधारणज्ञान सम्बंधी प्रश्न पुछने लगे मैनेँ उत्तर दे दिया आखीर मेँ उन्होने पुछा की बताओ अंग्रेजी भाषा मेँ कितने Tense हे । मैनेँ कहा 2 ! उन्होने कहा 3 । वो अपने बात पर अड़े रहे मैनेँ भी स्कुल के अन्य छात्रोँ को बुलाकर अपना पक्ष रखा । आखिर मेँ हम सब K.P.High School के अंग्रेजी शिक्षक प्रमोद मिश्र जी से मिलने गये । उन्होने हम सबको सही ठहराया । प्रमोद सर नेँ कहा की अंग्रेजी मुख्यतः दो प्रकार के है अमेरिकन अंग्रेजी । ऑल्ड अंग्रेजी । ब्रिटेन मेँ आज भी लोग 3 Tense मानते हे परंतु अमेरिकन अंग्रेजी मेँ 2 Tense बताया गया हे । ब्रिटेन के लोग रक्षणशील हे वे आज भी पुराने अंग्रेजी का इस्तेमाल करते परंतु न्युवर्ल्ड मेँ लोग भविष्य को Tense न मानकर Time मानते । जब भविष्य आया ही नहीँ उसके बारे मेँ हम ठिक ठिक कैसे बता सकते हे ? हम केवल अंदाजा लगा सकते हे की कल ऐसा होगा वैसा होगा पर वे अंदाज गलत भी हो सकते हे । आखिरकार झगड़ा खत्म हुआ और सारे लोग अपने अपने रास्ते हो लिये ....लेकिन उस दिन से वे कन्ट्राकटर मुझसे अछा बर्ताप करने लगे और हम अछे दोस्त बनगये ।
बुधवार, 23 अप्रैल 2014
समयराग
वो घंट नैवेद्य कहाँ गये अब तो शंख के ध्वनी भी दुर्लभ हे.....
क्या गलति हुआ हमसे जो हमेँ भगवान छोड़गये....
.धर्म के नाम पर दंगे होते, हो रहा हे बलात्कार.....
गलि गलि मेँ देख झाँक कर, नारी सहती हे अत्याचार....
दुषित हुआ हे जल और वायु, दुषित हुआ हे सबका मन .....
भारतवर्ष मेँ कोई ज्ञान देखता लोग देखते हे केवल धन......
.धन के लिये मनमुटाव धन के लिये दुःख संताप.......
फिर भी इंसान दिनरात देखते रहते इसीके ख्वाब,,,,,,,
और क्या कहुँ यही सबसे हुँ परेशान जनाब......,
सदस्यता लें
संदेश (Atom)