सोमवार, 25 अप्रैल 2016

मेरी मौत.......

मेरी मौत तुझे मौका दे जाए......
हो बर्बाद मेरी चाहत
तुझे सुकुन मिलजाए.......

में मरुँ तु अमर हो जा
मिले थे चंद फुरसत के पल
वो तु लै जा.....

..
मेरा अन्त तुझे आबाद कर जाय

मेरे आँखों के आँसू
तेरी प्यास बुझा जाय

बचगये है सुख के जितने क्षण....
मुफ्त नहीं है बिरादर
तेरा दर्द दे
मेरा चैन ले जा.........

रविवार, 24 अप्रैल 2016

हिन्दी से प्यार

हिँदी से प्यार बचपन मेँ हीँ हो गया था

तब विवधभारती का JORANDA सेँटर हमारे घर मेँ टिवी होने के बावजुद
रजनी बुआ के यहाँ शुना करते थे ।

मेरे ही तरह
स्कुल के दिनोँ मेँ #RAJUPRADHAN नामसे एक क्लासमेट को  हिँदी गाने शुनने का बड़ा शौक था ।

मुझे याद कभी कभी अतांक्षरी होनेपर वो हिन्दी गाना गाता था तो Sweto mastarji उससे चिढ़ जाते थे ।

उस दौर मेँ RAJU अपने क्लास का इकलौता होरो था जो बलीवुड के गानोँ को पसंद करता हो

बाकी 9th मेँ हिँदी को optional के तौर पर लेनेवाले तीन छात्र SWETO MASTARJI की मार से डर कर हिँदी लिये थे ।

मैनेँ तब हिँदी नहीँ लिया च्युँकि मेरा हिँदी मेँ लिखावट अछा न था
और
RAJU को उसके टपोरी टाईप अदाओँ के लिये SHIV MASTAR नेँ मनाकरदिया था ।

ब्रउनी ने कहा था........

Browni नेँ एकबार कहा था "Not failure but low aim is crime"

"कोशिश करके विफल होना नहीँ वरन कम लक्ष्य होना
अपराध है"

परंतु मुझे लगता है
सत्मार्ग मेँ चलनेवालोँ के लिये
कम लक्ष्य का होना अपराध नहीँ है
सच्चाई का एक मार्ग और लक्ष्य दस गलत राहोँ से बहतर है ।
लक्ष्य कम हो परंतु वह उम्दा व सच्चा हो तो अंत मेँ जीत आप ही की होगी ।

परमात्मा को साक्षी मानकर सच्चे और निश्चल भाव से लक्ष्य निर्धारण किया जाय तो ईश्वर की कृपा से वह अवश्य पूरा होता है ।

तब इस बात का कोई अर्थ नही रह जाता की लक्ष्य बड़ा है या छोटा है ।

गुरुवार, 14 अप्रैल 2016

पडोसी

"ऐ बाबुमोशाय हम तो रंगमँच की कठपुत्तलियाँ है जिसकी डोर उपरवाले की हाथ मेँ है"

"जबतक जैसे नचाएगा
नाचते रहेगेँ
पर हाँ
जबतक रहेगेँ
पड़ोशीओँ का सुखदुःख फेसबुक पर बाँटते रहेगेँ "

"कभी उनके अहंकार का मजाक बनाकर तो कभी उनके दुःख पर मरहम लगाकर"

"उनके दिखावे और नौटंकी पर हमारा व्यंग्यं घाव पर मिर्ची सा लगे तो तरकारी मेँ तड़का लगे न लगे जीँदेगी मेँ तड़का लग ही जाता है "

"बाकी ये तो सबके सब कुत्ते के दुम है कभी न सुधरनेवाले भला किसीके समझाने भर से क्या समझेगेँ "

ए दिल ऐ दुशमन मेरे

देख लेँ आँख खोलकर
दिल ए दुशमन मेरे ।

नफरत का ये आलाम
जाहाँ मेँ आम बना है ।

छाया है मौत का सामान
दिल और हवा मेँ

जबतब तुझसे
नफरत का पैगाम मिला है

वो तु ही था न जमानेँ से
मुझ पर वार करनेवाला ।

हमनेँ तो अभी अभी
अपना आँख भर खोला है ।

शान्तिदूत बनकर
न सुना अब
तु नयी कहानी ।

ये पाक बंगालादेश सब बताते
तेरी निशानी ।

तुनेँ ही तोड़ा था हिँदोस्थान
बनकर वैगाना ।

और हम ही भरते रहे
वक्त को हरजाना ।

आया है वक्त जान लो
बदलेगेँ अब जमाना ।

न चलनेदेगेँ देश मेँ
देशद्रोहीओँ का घराना ।

नौकर

दुनिया मेँ केवल कृषक हीँ ऐसे है जो स्वतंत्र होकर जीवन निर्वाह करते हे
अर्थात् वे किसी के नौकर नहीँ है न नौकरी करते हे ।

लोग प्रायः नौकरी शब्द का आक्षरीक अर्थ भूलजाते है

हमारे गाँव के एक सज्जन आज मुझपर वार करते हुए बोल पड़े

"तुम केवल पढ़े लिखे हो परंतु नौकरी तो नहीँ की न ! अब पताचला  तुम्हारा हैसियत क्या है ?"

वो जानते थे हमेँ बातोमेँ उलझाना मतलब
अपनी हार को नौता देना जैसी बात होगी

हमनेँ हँसते हुए कहा

"कुछ विज्ञ जन नौकरी शब्द का शाब्दिक अर्थ को भूल गये हे शायद

😀😀😀😀

अरे भाई नौकर + ई मिलकर जब नौकरी शब्द हुई है

इसमेँ भला क्या गौरब की बात है ?"

हम गुलामी को पसंद करनेवाले मानव अपने नौकरी के सपक्ष मेँ अकसर लम्बी लम्बी हाँकते है ।

कुछ भक्त तो खुद को भगवनजी के चाकर या नौकर बताचुके है ।

सच ही तो है

कई गुलामीओँ के जंजिरोँ मेँ जकड़ा हुआ जीव भी धरतीपर ईश्वर के नौकर हीँ तो है ।

वो यहाँ जीवनभर भगवनजी के लिये नौकरी करने के पश्चात

अपने कर्म अनुसार कर्म फल ले कर निकल लेता है

नयी नौकरी के तलाश मेँ ।

मंगलवार, 12 अप्रैल 2016

अन्याय को सहन करना....

अन्याय को सहन करना
ये मेरी वस् कि बात कहाँ

मैँ लड़ता हुँ मरता हुँ
मेरा लक्ष्य है
न्यायोँ का दुनियाँ

मारो गर कोई करता है
अन्याय तुमसे
तय कर लो अब नहीँ सहना


तुम कहोगे क्युँ लढ़े हम,
मरे हम
जब सह लेते है

मेरे दोस्त !
यकिन कर
ऐसी बातेँ
कायरोँ को ही आती है !

खुदको कहते हो मर्द
या तुम्हे लगता है
तुम्ही हो शक्ति

तब उठाओ हतियार
चीर दो छाति उनकी
न रहे भ्रष्टाचार
या कोई भ्रष्ट व्यक्ति