दिल से लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
दिल से लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 14 नवंबर 2017

Children day special;कैसे बच्चे बनगये डॉलफिन

कैलिफोर्निया के
सुमास कवीले में एक दंतकथा है ।
उनका मानना है कि बहुत साल पहले
उनकी देवी हुतास्
चाहती थी कि जो द्वीप में रहते है वो mainland में चलेजाएँ
तो उन्होंने एक पूल बनाया
Rainbow से
सब लोग उस रेनवो को पार कर रहे थे
मैन लैंड कि तरफ जाने के लिए exited थे 
बच्चे उच्छल रहे थे
बहुत मजे़ कररहे थे
नाच रहे थे
अब आप जानते ही होगें
बच्चे कैसे मजे़ करते है
खैर
उन बच्चों में से बहुत से बच्चे
इत्ते उधम मचाने लगे कि
एक दुसरे को
धक्का मुक्की का खेल खेलने लगे
इससे यह हुआ कि बहुत से बच्चे
बीच समंदर में ही गिरने लगे
उनको बचाने के लिए
कोई भी बडा आदमी आगे न आया
च्यूंकि उन्हें डर था की कहीं
इससे उनकी
देवी ह्युतास् उनसे नाराज़ न हो जाय .......
पर हुतास् नें उन्हें बचालिया
उन बच्चों का खेलना
हुतास् को बहुत पसंद आया
तो
उसी पल् जब बच्चे पानी में गिरे
उन्होंने उन बच्चों को डॉल्फिन्स बनादिया
ताकि वो हमेशा हमेशा खेल सके ....

शनिवार, 9 सितंबर 2017

●●●●●अयं कः●●●●

एक अनपढ़ ब्राह्मण पाण्डाजी  थे वो एक दिन मिश्रा जी के यहां गये हुए थे
तभी वहां एक विद्वान पंडित रामेश्वर भारती आये ओर आकर मिश्रा जी से संस्कृत में बतियाने लगे ....
उन्होंने पांडाजीकि ओर उंगली दिखाते हुए मिश्रा जी से पुछा “अयं कः(ये कौन)
मिश्रा जी ने उनको बता दिया
फिर
जब कार्य खत्म हो जानेपर  रामेश्वर भारती जाने लगे पांडाजीने मिश्राजी से पुछा
का हो ! का वोलत रहे भैया ऊ....
“अयं कः” ?
आखिर कार ई अयं कः का क्या मतलब है ?

मिश्रा जी चिढते हुए बोले
बोल दिया सो बोल दिया
अब पुछने से मतलब ?

लेकिन पांडाजी जिद करने लगे सो मिश्रा जी ने
गम्भीर चेहरा बनाते हुए कहा....
ओहो !!!! कित्ता बडा़ गाली दे गये वो....
पता है आपको....?
कैसे पता होगा बोलो
बचपन में पढाई किए नहीं अब का खाक् समझेंगे
चलो जो हुआ सो हुआ
अब बडे आदमी ने बोल ही दिया है तो का कर सकते है भैया ?

पांडाजी के सफेद  आंख तुरंत लाल हो गये
गुस्से में स्वयं पर्शुराम समान रुप धर कर मिश्रा जी को कहने लगे

“मिश्राजी उ पंडित होगा उकरे घर मां' हमें गारी काहे दे रहा था ?”

ओर इत्ता कहके
पांडाजी
रामेश्वर भारती के पिछे दौडते हुए उन्हे कहने लगे

ओ पंडित
तुम अयं कः,तुम्हारा वाप अयं कः ,तुम्हारे सात पुस्ते अयं कः 😜😂🤣🤣🤣

सोमवार, 26 जून 2017

आवास योजना और साहुकारन मौसी

गांवों में आवास योजना से लाभ लेनेके लिए लोगों मे उत्सुकता पिछले दिनों अपने चरम पर था....
सरकार से देढ लाख कि धनराशि घर बनने के लिए मिलरहे थे तो लगभग ज्यादातर लोगों ने इसके लिए फर्म डालना चाहा....
अब ऐसे मामलों में लोग उतने जानकार नहीं होते तो वो किसी स्थानीय जानकार कम् पार्टी दलालों से सहायता मांगते है....
हमारे गांव के लोगों ने भी यही किया
कुछ रुपयों के एवज में स्थानीय पार्टी दलालों नें भी कमर कस लिया....

गांव कि एक झगडालु साहुकारन महिला को जब पताचला देढ लाख मिलरहा है वो भी इस योजना से लाभ उठाने हेतु
फर्म भरने पार्टी दलाल के पास पहंच गयी.....
उसे देख दलाल हैरान
पुछने लगा क्यों मौसी क्या हो गया
मुझे बुला लेती ?
साहुकारन मौसी बोली
बेटा सबको १.५० लाख मिलरहा है मुझे भी दिलवा दे.....
दलाल नै हंसते हुए कहा
मौसी यहां घर बंट रहा है घर
पैसे युंही नहीं मिलेगें
घर बनाने होगें और इससे पहले
और बादमें इन्क्वायरी भी होगी
अब तु कहां घर बनवाएगी
घर के उपर 😂😂😂
तब तो जेल जाएगी बुढ़ापे में

इतना सुनना था कि बुढि मौसी डरते हुए बोली ना बेटा ना हमें जेल नहीं जाना
तु अपना घर ओर पैसा अपने पास रख मैं तो चली....

रविवार, 2 अप्रैल 2017

सबकुछ शिवमय है

#शूद्र

जब मैं अपने दान्त ब्रस कर रहा होता हुँ,स्नान कर रहा होता हुँ
शुद्ध होने कि प्रयत्न कर रहा होता हुँ तब तुम मुझे शूद्र समझना....
जो शुद्ध है वो शूद्र है.....
जिसके तन और मन दोनों ही स्वच्छ हो और
समस्त संसार को साफ सुन्दर रखनेवाला हो
वह शूद्र होता है....
संसार के समस्त बुराईओं को निगल जानूवाला
शूद्र कहलाने लायक है.....
इस हिसाब से भगवान शिव शूद्र है....
च्युंकि समस्त संसार का विष रुपी बुराईओं को अकेले उन्होने ही पान कर लिया था....

संसार में बुराई फैलाना ,जातिवाद फैलाना शूद्र का कार्य नहीं सबको साथ लेकर चलना स्वच्छता का शिक्षा देना उसका कर्त्तव्य बताया गया है.....

#वैश्य

जब मैं जीवन का हिसाब किताब करने लगता हुँ....
कि मेरे जीवन मूल्य क्या है ?
क्या है मेरे लक्ष्य ?
जीवन के हर क्षण का सही इस्तेमाल करना सिख रहा होता हुँ.....
साधो !!!!!!!!!
तुम मुझे वैश्य समझना.....
ओडिआ भागवत में एक पद है.....

"धन संचये चर्म करि
स्वभावे तर नरहरी"

जब मैं धर्म के लिए धन का संचय कर रहा होता हुँ तब मुझे वैश्य कहाजाय......
ओर मानव धर्म होता जनकल्याण ....
जो वैश्य है उसका परम कर्त्तव्य है
वह मानवसेवा रुपी अपने धर्म का पालन करने हेतु धन संचय करे ......और उस धन का इस्तेमाल समाज के हित मैं व्यय करे
तभी उसे वैश्य कहा जाएगा......
इसलिए भगवान शिव वैश्य है......
स्वयं देवादी देव महादेव  होकर भी वे निर्धन सा रुप धारण कि हुए होते है....
च्युंकि उन्होने अपना समस्त शक्ति तथा ज्ञानरुपी धन देवता मानव दानवों में बाँटदिया......
लेकिन उनके पास न तो धन का घंमड शेष बचा न ही दानी होने का अहंकार....

#क्षत्रिय
जब में सत्य के साथ रहकर पाप तथा पापीओं के खिलाफ संखनाद कररहा होता हुँ....
मेरे शरीर के अंतिम रक्तकण बह न जाने तक
मेरा पापीओं के खिलाफ युद्ध जारी रहता है....
जब मैं आततायीओं से साधुओं की रक्षा कर रहा होता हुँ......
जब में
दुसरों के दुःखों को अपना समझकर उनके लिए बिना लाभहानी के चिंता किए
लढता रहता हुँ
जब धर्म कि रक्षा के लिए मेरे हतियार थरथराने लगते है तब.....हाँ....तब तुम मुझे क्षत्रिय समझना.......
तो इस नाते भगवन शिव क्षत्रिय है....
उन्होने विभिन्न युगों में पापीओं के विनाश हेतु 21 अवतार लिया...
कई भयानक राक्षस जो साधुओं के लिए काँटे के समान थे उनका विनाश शिवजी ने किया था.....

#ब्राह्मण

जब मेरे मन मे सात्विक भाव उत्पन होते....
जब मुझे समस्त संसार उसमें रहनेवाले सभी प्राणीओं में ब्रह्म का दर्शन होने लगता है....
जब मैं वसुधैव कुटुम्बकम् यानी समस्त संसार मेरा परिवार मानने लगता हुँ....
देव !!!! तुम मुझे ब्राह्मण समझना......
*ब्रह्मम् जानति इति ब्राह्मण*.....
जो ब्रह्म को जान ले वह ब्राह्मण कहलाएगा....
जिसे जल स्थल आकाश दशों दिशाओं मे ब्रह्म ही ब्रह्म दिखे वही ब्राह्मण है.......
संसार में ब्राह्मण का कर्त्तव्य
ज्ञानार्जन कर उस ज्ञान को समाज के हर वर्ग के योग्य व्यक्तिओं में बांटने को बताया गया है.....
अर्थात् सत् धर्मयुक्त ज्ञानी व्यक्ति ब्राह्मण कहलाने योग्य है.....
अतः आसुतोष सदाशिव ब्राह्मण है....
च्युंकि एक ब्रह्मज्ञानी परम बेत्ता सतपुरुष ब्राह्मण
ही अज्ञान रुपी विष को पचा सकते है....
संसार के प्रत्येक प्राणी निर्जिव को ब्रह्म
समझकर जो उनका दुःख स्वयं पर ले लेता हो
केवल वही ब्राह्मण कहलाने के लायक है

सो हे मानव !!!! स्व जाति को लेकय घमंड न कर.....
च्युंकि समस्त जगत शिवमय है....
तुम्हारा प्रारम्भ शिव से अंत भी शिव में ही हो जाना है....

●●●●●हर हर महादेव शम्भु शंकर●●●●●●

गुरुवार, 29 दिसंबर 2016

मेरा अजीब सपना

मुझे एक सपना तीन चार बार आ चुका है ।
मैं  ट्रेन मे बैठकर कहीं जा रहा हुँ...

एक जंगली जगह पर गाडी धीरे धीरे चलते हुए रुक जाता है । गाडी बिलकुल खाली जा रही थी....

उस वोगी में मैं अकेला ही बैठा हुआ था...

मुझे ट्रेन मे हमेशा विंडो सिट् के पास बैठकर बाहर प्रकृति को निहारने मे अछा लगता हे ।

तो मैं विंडो सीट के पास बैठके खिडकी मे से बाहर देखे जा रहा था ....

कि एक सुन्दर कुत्ता मेरे सामने अपने पुंछ हिलाते हुए
मुझे प्यारी नजरों से देखे जा रहा था ....

क्षणभर के लिए
मुझे लगा

मानो वह कुत्ता मेरा पालतु हे
मुझे अपना मालिक समझता है ....

मेरे हाथ मे उस समय
घर से लाए हुए मिठाई था ....

स्नेहवश मैं वह मिठाई उस कुत्ते को देने  के लिए जैसे ही गाडी से निकला वह कुत्ता मुझपर टुटपडा....

वो मेरा भ्रम था कि वह एक कुत्ता था ....

अगले ही पल मैं अपने सपने मे उस कुत्ते को वाघ होते देखता हुँ ....

और खुदको बचाने को गाडी मे चढजाता हुँ.....

.....
हम इसतरह के सपने तभी देखते है जब किसी असमंजस मे फंसे हुए होते है ...
इसमें कोई रहस्य नहीं ...कमसे कम मुझे तो ऐसा ही लगता है

गुरुवार, 1 सितंबर 2016

People are'nt fake

fb is not real
not real anything here
so why you
just love fb my dear ?

why you
come every hour
in fb !

why you Search
your freinds

liked and coment
her/him posts

when fb is lots of
fake people

so why you send
them freind requests

i think
the real world is just
like fb

people are not fake
not fake thare thoughts

निषाद

मानव मनमेँ एक बहुत ही विषैला तत्व पैदा होता रहता है
#घृणा

ये इतना ताकतवर है कि
धीरे धीरे जेनेटिकाली
मानव जिँस मे
घुस चुका है ।

अब चलिये 4000साल पुराने जमाने मे चलेँ

आर्यावर्त के पूर्वी भागमे कुछ आर्योँ को मछली खाने का शौक पड़ा

वे नाव बनाने कि कला विकशित करने तथा मछली पकड़ने मे
सिद्धहस्त हो गये ।

समुचे आर्यवर्त मे ताम्रलिप्ती का डंका बजने लगा
फिर क्या था
कुछ लोगोँ को ये गलत लगा
उन्होने इन लोगोँ को निषाद नाम दे दिया

कुछ हजार साल बाद इन पापी  अधम लोगोँ पर राज करने के लिए
कुछ क्षत्रिय आए
ओर एक आद संघर्ष के बाद यहीँ के होकर रहगये
फिर वो जब इन लोगोँ के तरफदारी बचाव मे खड़े हुए

केन्द्रिय सत्ता ने इन क्षेत्रियोँ को  एक नाम दे दिया
पतित क्षेत्रिय
जो बादमे
राजा उड्र के नाम से उड्र जाति कहलाया ।

अगले
1000साल मे
आर्यवर्त के हर ग्रंथ महाभारत रामायण मे
ये निषाद लोग हारते रहे कभी
दूर्योधन के हातोँ निषाद कन्याएं
अपमानित हुइ
कभी कर्ण आया निषादोँ को जीत कर लौटा

4थी ईसापूर्व आते आते
निषाद देश पर
नंदराजवंश राजकरता था
अगले
400 साल मे अशोक राजत्व तक
निषादोँ को घृणा द्वेष का पात्र बनाया गया ।

अबतक निषाद पराधीन होते थे
लोकतंत्रिक शासन से अब उनका लगाव कम हो गया था
उन्हे एक शक्तिशाली राजा नायक कि जरुरत हो रहा था

कौन कौन कौन ?
अन्त मे तलाश खत्म हुए ऐर
प्रमुख का पुत्र महामेघवाह खारबेल को शासक बनाया गया

1म सदी मे विखरे पड़े अशोकान साम्राज्य को एक करके
रोमन्स को धूल चटाके
आर्यावर्त को गौरवानित बनाकर
वो सम्राट फिर संत बनगया ।

5वीँ सदी मे फिर एक निषाद का जन्म हुआ
ययाति (जजाति) केशरी
वो हालाँकि पूर्वी आर्यवत को ही एक करपाया ।
उसने 10000 ब्राह्मणगाँव बसाये

और
उन ब्राह्मणोँ ने फिर भारतीय ग्रथोँ मे उत्कलभूमि की तारिफोँ मे छड़ी लगा दीँ 

वक्त बदलता गया

7वीँ सदी से 17वीँ सदी तक के काल मे आए अनगिनत उतार चढ़ाव के बीच
ये निषाद लोग अब
चीन जापान मिशर युरोप मलेशिया इंडोनेशिया मे व्यापार के साथ
धर्म प्रचार पाली संस्कृत भाषा फैला रहे थे ।
बड़े बड़े मंदिर आज भी उन देशोँ मे निषादलोगोँ कि अन्तिम निशानी के तौर पर जिर्णशिर्ण
पड़ा हुआ है ।
बहरहाल
निषादोँ ने विँधाचंल का घमँट तोड़ दिया !
उत्तर पश्चिम पूर्व आर्यावर्त के साथ दक्षिणी भाग के लोगोँ का
वर्षोँ के टुटे रिस्ते फिर जुड़े

निषादोँ कि पराक्रम से कुछ लोग जल भुन कै बैठे हुए थे

क्या करेँ
क्या करेँ
उन्होने एक पुरातन ऋषि का नाम आगे कर दिया

कहने लगे
पापी नीच दुराचारी
अभागे अनार्य
निषाद नहीँ
ये सब एक अकेल

अगस्य ऋषि कि करामात है
वे सागर को पिई गये
विँधाचंल को झुकादिया
उत्तर दक्षिण को एक करदिया
वगैरा वगैराह !

ये द्वेष कहीँ आपके DNA मे तो नहीँ ?

यदि होगा
आप आज भी हम निषादोँ को
सौतेले मानते होगेँ

सालाचमार कहते होगेँ ।

आपको यदि निषादोँ के देशमे कुछ भी अच्छा नहीँ दिखता हो
और आपका दिल चाहता हो
इनकी जमकर बुराई करुँ
समझ लिजिये
आपके DNA मे
ये प्राचीन द्वेष घृणा वाली गुण
आज भी है ।

गुरुवार, 7 अप्रैल 2016

हमारे पडोसी है ऐसे

हे भगवान !
हम भारतीयोँ को ये कैसे पड़ोशी दे दिये आपने !!

एक #पाकिस्तान दोगला #अमरिका के तलवे चाटता है वहीँ #चीन जा के दोस्ती यारी का कसमेँ भी खाता है

इस आश मे कि इंडियावाले जलजायेगेँ डर जायेगेँ !

इस बात से अनजान्
वो जिनको अपना मान रहा है वे कभी भी भरोसा करने योग्य नहीँ रहे ।

पाकिस्तान डबल गेम खेलने मे माहिर हो गया है

कभी भारत कि सीर [Kashmir] काटने कि बात करता है कभी दोस्तीवाली हात मिलाने कि !!!

#नेपाल ............

इस दोमुँहा दोगला एहसान फरामोश बैइमान देश को युँ ही छोड़ा नहीँ जा सकता ।

नेपालीओँ को लगता है कि पिछले दिनो उनके देशमे हुआ भुकंप भारतीयोँ के वजह से आया था
वरना बीना दोष भगवान उनको क्युँ हीला दिये !!!!

इनको अपने गुर्खा भाईओँ पर कुछ ज्यादा ही घमँड हो गया है शायद !!

कहते हे याद हे फलाने वार मे गोर्खाओँ ने ये उखाडा था फाडा था
जैसे हमारे #पंजाबी #राजस्तानी #मराठी #हरियाणवी #उत्तरभारतीय #दक्षिणभारतीय #ओड़िआ भाई तब हात मे चुड़ी पहन के घरमे छुपे बैठे थे !!

क्या कभी आपने #Hollywood फिल्म Minions देखा है ??? इस फिल्म के ये
Minions अब्बल दर्जे के चमचे
बताये गये है
वो सदीओँ से चमचागीरी करते आये है और आगे भी करते रहेगेँ

कुछ ऐसा ही फितरत नेपालीओँ का भी रहा है
पहले अंग्रेजोँ के तलवे चाटते थे
फिर भारत अब चीन कि गुलामी करने की तैयारी चल रहा है ।

इन 2 कारणों से युवाओंका जीवन होते बर्बाद........

मुख्यतः इन दो चिजोँ के लिये ज्यादातर युवाओँ का जीवन बर्बाद हो जाता है

झुठा प्रेम इश्क महब्बत प्यार

और

गलत नियत और द्रव्योँ से किये गये नशा (इसमेँ वियर से लेकर हर तंबाकु उत्पात तथा कामवासना भी सामिल है ।)

आप कहेगेँ नशा तो ठिक परंतु प्रेम तो जीवन को  साफल्य करता है यह तो हितकारी है ।
तो
चलिये  इसबात पर याद करते है वो अमर हिँदी गीत
जिसमेँ दो लफ्जोँ मेँ बतादिया गया हे कि प्रेम और आकर्षण मेँ फर्क क्या है ?

"दो लफ्जोँ कि है दिल कि कहानी

या है महोब्बत या है जवानी"

यह हिँदी फिल्म The great gambler का गीत है

जवानी के जोश मेँ हुए शारीरिक आकर्षण को प्रेम इश्क मोहब्बत कहना गलत होगा ।

इस आकर्षण मेँ अकसर लोग अपने संयम खो कर सामाजिक बंधन और रिस्तोँ की मर्यादाओँ को भूलजाते ।

और जब दिन गुजरने के साथ साथ आँख से पर्दा हटता है तो बहुत देर हो चुकी होती है ।

#यंगिस्तान

बुधवार, 23 मार्च 2016

कन्हैया कुमार को मेरी खुली चुनौति

कन्हैया तुम किस् खेत कि मूली हो वे ?

युँ तो हमारे भी दिल मे भरे है कईओँ के लिए नफरते
लेकिन क्या हमने किसी कमजोर क्षण मे भी
पाकिस्तान जिँदावाद
भारत मूर्दावाद के नारे दिए ?
नहीँ....

शायद हम तुम्हारे तरह
देशद्रोही नहीँ....
तुम सारे विश्व का जयजयकार करना चाहते है
अछि बात है
लेकिन क्या तुमने अपने पूर्खोँ का इतिहास पढ़रखा है ?

शायद तुमने अनुभव नहीँ किए होगोँ
विदेशीओँ का हमारे पूर्वजोँ पर किएगये उन अनगिनत अत्याचारोँ का

च्युँकि शायद तुम्हे अपने देश से ही प्रेम नहीँ !
शायद तुम्हारे पूर्वज भी गद्दार ही थे
और उनकी गद्दारी कि
कहीँ कोई अन्तिम निशानी तुममे उभर आई है ।

तुम युँ पाकिस्तान जिँदावाद का नारा बुलन्द करते हुए क्या साबित करना चाहते हो

जिस नादान ,पैदल नापाकिस्थान कि तुम पैरवी कर रहो
उसने भारत को इन 70 सालोँ मे जो जख्म दिए है
क्या तुम्हे वो नहीँ दिखे
या जानकर भी अनजान बने फिरते हो ।

और अन्ततः तुम्हे आजादी चाहिए

एक आजाद देश मे उसी देशको गरियाकर तुम अभी भी जिँदा हो
इसे तुम अपनी आजादी ही समझो
च्युँकि जिसदिन हम खुदको खुदसे आजाद कर देगेँ
न तुम रहोगे
कोमरेड़ ना तुम्हारे आका

मंगलवार, 22 दिसंबर 2015

इतिहास को किताबोँ मे ही दफ्न रहने दो

हिन्दोस्तानी इतिहास को किताबोँ मे ही कैद रखना पसंद करते है.....,,,

वो अतीत को आदर करते हे
सम्मान और प्रणाम भी करते हे
परंतु उससे सिखते विखते कुछ नहीँ........

आज मुझे वो हाइस्कुल के दिन याद आते है...

जब शाम तिन बजे इतिहास का पिरियड़ शुरु होता था

क्लासमे
तिन या चार छात्रोँ को छोड़ देँ तो बाकी के छात्र केवल स्कुल बैल कि घँटि कि प्रतीक्षा मे बैठे पायेजाते थे......

ज़ाहिर सी बात है भारतीय लोग इतिहास को #बकलोली ही समझते है....

नज़ाने किस नामुराद् ने इतिहास को पठन का विषय बनादिया....

इतिहास किताबोँ मे ही कैद अछा लगता है .....



गुरुवार, 3 दिसंबर 2015

आक कि बात

भगवन शिवजी को अतिप्रिय #उपविष तत्ववाला जैविक पारा के नामसे प्रशिद्ध औषधीय #मदार वृक्ष से संभवतः आप परिचित होगेँ ।

#महाभारत के आदिपर्व मे उपमन्यु कथा आता है
इसमे गुरुआज्ञा से जंगल मे गाय चराने गये धौम्य शिष्य
क्षुधाज्वाला से पीडित उपमन्यु #अर्क का पत्ता खा लेता हे जिससे वो अंधा हो जाता है ।

संस्कृत मे इसे #अर्कसस्यम् कहाजाता है जबकी हिन्दी की आम वोलचाल के भाषा मे #आक अधिक प्रचलित पाया जाता है ।

ओड़िआ लोग आक को #अरख Arakha तथा बंगाली #आकोन्दो Akondo कहते है ।

इसी आक या मदार से जुड़ा एक मजेदार किस्सा याद आ रहा है ।

मेरे गाँव का एक ब्राह्मण लौँडे को
सर्दीओँ के दिनो मे एकबार खुजलीवाला चर्मरोग हो गया था !
वेचारा दिन रात बस खुजला खुजला कर परेशाँ हो जाता था !

अब च्युँकि वो 80का दौर था तथा उसके मातापिता गाँव के गरीब तथा पुराने खयालात् के लोग थे इसलिये इस चर्मरोग का दवादारु करनही पा रहा था !

उन दिनोँ गाँव मेँ सोमुचाचा के बड़े भाई इंदरचाचा सबसे इंटेलिजेँट व टेलेँटेड़ व्यक्ति माने जाते थे !

वो ब्राह्मण लोँडा इंदर मिश्र चाचा के शरण मे गया और कहने लगा

'ताऊ जी कौनो दवादारु बतावो इ खुजलन से बहत परेशान है आजकल ! '

इंदरचाचा ने थोड़ा सोचा फिर कहा ....

जा बचुआ आक का दुध लगा

1 दिनमे तेरा खुजली और बिमारी दोनो ठिक हो जावेगेँ !

लौँडे ने ऐसा ही किया B-) B-) B-)
फिर क्या था ....

देशी दवा कि प्रतिक्रिया से और तेज खुजली होने लगी

वेचारा मन ही मन इंदरचाचा को गारियाने लगा छटपटाने लगा ।

किसी ने कहदिया पोखर मेँ स्नान कर ले
वो औँधे मुँह तालाब कि और भागा .....

और सच्ची बताएँ पोखर के पानी मे जाइके उहे चैन मिली...

आज भी इंदरचाचा आक का दवा देते समय विमार लोगोँ को यह किस्सा सुनते है
और कहते

आक एक अचुक औषध है बस उसको सही मात्रा मे लेना
बहुत जरुरी है नहीँ तो जहर का असर घातक हो सकता है ।

गुरुवार, 26 नवंबर 2015

शैफाली तु हारकर भी जीत गयी.....

शर्दिओँवाले शाम है ,फुरसत के पलोँ को अकेले बिता रहे है या कोई खुबसुरत यार आपके साथ हो....
ऐसे ही रोमाँटिक क्षणोँ को और रोमाँटिक बनादेता है
‪शैफाली‬[प्राजक्ता] फुलोँ कि खुशबु .....
इसकी सुगंध से एकाएक
मन कि सारी थकान और नैराश्यवाद मिटजाता है
अंग्रेजलोग हालाँकि इसे दुःख का फुल कहते है और रात कि रानी भी....
शेफाली फुल पर पश्चिमी सभ्यता मे एक फैरी टैल फैमस हुआ है !
'किसी देश कि राजकुमार के इंतेजार मेँ एक सुंदर राजकुमारी का फुल बनजाना और ये इंतेजार कभी न खत्म होना ....
दर'सल ये कथा ‪ विष्णुपुराण‬से लिया गया है या प्रेरित मानाजाता है ।
विष्णुपुराण मेँ शेफाली फुल कि कथा आता है जो इस प्रकार है :-
===>
एक सुंदरी राजकन्या सूर्यदेव से प्रेम करने लगी
जब प्यार परवान चढ़ने लगा उससे रहा न गया ! उसने सूर्यदेव का आवाहन किया
भगवन आये और उसे साथ ले गये परंतु जैसे जैसे राजकन्या सूर्यदेव के साथ दिन बिताने लगी वो शुखने लगी ।
सूर्यदेव ने राज्यकन्या को धरती पर छोड़दिया और अपने प्रियतम के बिछड़न् के वजह से राजकन्या तड़प तड़प कर मरगयी ।
राजकुमारी की मृत देह का दाह संस्कार के बाद उसके देहाभस्म से एक ‪ लतिका ‬का जन्म हुआ । वो यही ‪ शैफाली_फुल_का_प ैधा‬था !
आज भी वो अपने प्रियतम के लिये रातभर सजती सवरती परंतु सुरज कि किरणोँ से उसके सुंदर फुल झड़जाते ।
=Extra shot=
शैफाली फुल पर
ओड़िआ कवियत्री ,स्वतंत्रता सेनानी ,
‪कुन्तलाकुमारी_स ावत‬ने "शैफाली" नामसे एक कविता लिखा था ....
इस कविता मेँ
सिर्फ 35 वर्षोँतक जीवित रही इस नारीनेत्री ने अपने जीवन को शैफाली फुल कि तरह बताया है ....और खुदको तथा अपने जैसे हजारोँ को ढ़ाड़स बाँधने के लिये कहा है
'शैफाली'
तु रोज रात को सजती सवरती है ,
ये जानते हुए कि रात के बितते ही तेरा ये रुप रंग सब मिट जाएगा
तेरी ये कोशिश अमर रहे
तु हार कर भी जीत गयी
और वक्त जीत के भी हार गया

शनिवार, 3 अक्टूबर 2015

नयी दुनिया

हाँ मे डरता हुँ च्युँकि
मुझे डरना है इसलिये.....

ये नयी दुनिया आपको जबतब डराने के लिये ही तैयार बैठा है....
हमेशा यही डर लगा रहता है
क्या कलतक मेँ मेरे बच्चे जीवित रह पाएगेँ....
हालाँकि ये दुनिया हमेशा से इतना बेरहम तो नहीँ था....
कितना सुहावना सुंदर था मेरा बचपन और युवाकाल भी.....
परंतु अब वो दुनिया नहीँ रहा...

वो मेरे गाँव और खेत खलियान नयी दुनिया कि क्रोध का शिकार हुए ,...
बड़े छोटे नदी तालावोँ मे पानी की एक बुंद भी नहीँ है ।

इन बुढ़े बेवस आँखोँ को रोज जंगल और वृक्ष कि सपने आते है पर वास्तवता डरावना है......

नकारात्मकता से भरा हुआ
इस नयी दुनिया मेँ कभी खुदको ताकतवर समझनेवाला इसांन आज
जिँने के लिये संग्राम कर रहा है ।
हाँ मे डरता हुँ मुझसे....मेरे जैसोँ के द्वारा बनाये गये इस नयी दुनिया से.....क्युँकि यही हमसबका प्रारब्ध है......
हमने विनाश का ही वीज वोया था और आज हम सब डरे हुए है

हाँ ये हम सबका अंत है.....

[मदन दास
-03.08.2059]


सोमवार, 20 अप्रैल 2015

शोला हुँ....,

शोला हुँ ,
भड़कने की गुजारिश नहीँ करता
सच मुंह से निकलजाता है
कोशिश नहीँ करता
मेँ जख्म तो रखता हुँ नुमाईश नही करता........मुजफ्फर
ये ताकतवर शेर लगता हे मेरे व्यक्तित्व के लिये फिट बैठता है । एक तरह से मेँ क्रोध करनेवाले इंसान हुँ जब सच्चा को झुठा बतायाजाय, मुझसे मेरे परिवार से कोई जोर जबरदस्ती करने की कोशिश करता है तब मेँ क्रोधित हो जाया करता हुँ ।
परंतु मैनेँ क्रोध को बस मेँ किया हुआ है यह जानते हुए कि ये विनाशकारी और हानिकारक हे मेँ तबतक सहनकरता हुँ जबतक किसी बात को सहन कियाजासके ।
हम सारे कायेनात से अमन कि आशा रखते है वशर्ते वो हमपर वेवजह हमलेँ न करे ।
खुद जल जायेगेँ,किसीको जलाएगेँ नहीँ ।
शैतानीयतको वही दवा देगेँ बढ़ायेगेँ नहीँ ।
रव को भी ये ही बात तो पसंद है अलताफ ।
हम भी खुश रहेगेँ बाद मेँ पस्तायेगेँ नहीँ ।

गुरुवार, 15 अगस्त 2013

15 august Ke fb status

(01)

मिल जाते है मनचले
देशभक्ति का लगन लेके ।
जी जाते है जीवन को
क्षण भर मेँ जान दे के ।।

मिल जाते है दिवाने
वंदेमातरम गाते गाते....!
दे जाते है फलसफा
देशभक्ति मेँ रंगते रंगते ।।

(2)

हम इतने स्वतंत्र हो गये.....
भ्रष्टाचार करने मेँ खो गये.......
मन्नतचढ़ावे के नाम पर
भगवान को रिश्वत दे गये.....
हम इतने स्वतंत्र हो गये.............

(3)

हमतुम गर एक हो तो क्या कर लेगी दुनिया ?
अकेले चलने मेँ फायदा क्या
साथ चलने का मजा हीँ कुछ और है....

(4)

अंग्रेजियत जबतक जिँदा रहेगा
तबतक देश पराधीन रहेगा ।।
कौन सी स्वतंत्रता का वात करते हो ?
यह स्वदेशी अपनाओँ तब मिलेगा ।।

(5)

जियोँ हरदिन स्वत्रंतता के नाम पर
एक दिन मेँ देशभक्त कोई बनता नहीँ ।
जियोँ गर जीना है सर उँचा करके
देशभक्त कभी कहीँ झुका नहीँ ।

(6)

दिवानेँ है बचपन से, दिवानेगी मेँ जिते है ।
तुम एक दो दिन प्यार जताते मिलते हो ,
हम रोज उनके लिये मरते है ।

( 2012 15 August मेँ लिखा गये मेरे FB STATUS UPDATE)